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Sunday, 18 May 2025

आजादी कविता | कविता आजादी | कविता पर कविता | Hindi Poem | हिन्दी कविता | आजादी पर हिन्दी कविता

  आजादी 


15 अगस्त है दिन आजादी का,
लेकिन तब होगी सच्ची आजादी !

जब मिले हर भूखे को खाना,
हर गरीब का हो आशियाना 
हर हाथ को जब काम मिले 
काम का वाजिब दाम मिले 
हर एक बच्चा जब शिक्षित हो 
भविष्य देश का सुरक्षित हो 
अवसर शिक्षा के मिले सबको समान 
हर गॉँव शहर में हो शिक्षण संस्थान 
खेलकूद में मिले सबको भागीदारी 
लोहा हमारा माने ये दुनिया सारी 
महंगाई का ना हो जनता पर वार 
देश में कहीं भी ना हो भ्र्ष्टाचार 
जनता करे जब कानून का पालन 
देश में हर ओर हो अनुशासन 
माँ बहनों पर ना हो अत्याचार 
मासूमों से ना करे कोई बलात्कार 
न्यायालय करे जब निष्पक्ष न्याय 
किसी निर्दोष पर ना हो अन्याय 
छोटे बड़े में ना कोई अंतर हो 
एक साथ चलने का मूलमंत्र हो 
हर किसान जब हो खुशहाल 
अन्न के भंडार भरे हो विशाल 
साफ स्वच्छ मिले सबको पानी 
भूख प्यास से ना मरे कोई प्राणी 
स्वास्थ्य की होगी जब सारी सुविधाएँ 
पहुँच में होंगी सब महंगी दवाएँ 
लाइलाज जब कोई मर्ज ना हो 
बीमार के सर पर कर्ज ना हो 
हर गांव में बिजली चमकती हो 
हर सड़क हर गली दमकती हो 
सड़कों का चारों और बिछा हो जाल 
देश का कोना कोना हो खुशहाल 
सेना के पास हों आधुनिक हथियार 
दुश्मन रहे सदा सिमा के उस पार 
जात धर्म पर ना हो कभी भी लड़ाई 
मिलकर रहें हिंदू मुस्लिम सिख इसाई
सत्य और अहिंसा का संबल हो  
विश्व में मेरा देश भारत अव्वल हो  
जिस दिन सच होगा मेरा ये सपना 
सही मायने में होगा देश आजाद ये अपना 

'' जय हिंद ''




Thursday, 4 March 2021

कविता क्यों खंड खंड उत्तराखण्ड | उत्तराखण्ड पर कविता | Poem on Uttarakhand | Hindi Poem

 कविता 


 क्यों खंड खंड उत्तराखण्ड 


 क्यों खंड खंड उत्तराखंड
यह प्रकृति और मानव का द्वंद्व
यह मानव का ही क्रूर प्रयास
मानव की न बची कोई आस
प्रकृति का हो गया रौद्र अट्टाहास
साक्षात कलेजे के टुकड़ों का
अथाह जल में समाते देखना
कर गया जड़ पथराई आँखों को,
अब चूल्हे पर कुछ न सेंकना
सम्पूर्ण हुआ जीवन चक्र उनका
परब्रह्म से जन्मे,
परब्रह्म के द्वार पर,
हो गये परब्रह्म में लीन ।
ये मानव का ही घोर कृत्य,
हर जगह जो हुआ यमराज नृत्य
बिछड़ों को अब बस ताकते हैं लोग
क्या करें! न कर सकते सुख भोग
क्या करेंगे सुख भोग कर
उनके लिए जो न आ सकते हैं मरकर
इन खूबसूरत खामोश वादियों में
प्रेतात्माओं का विचरण,
पता नहीं अब कब चमके,
आशाओं की किरण,
खुश हो राक्षस मना रहे,
मानव का ये मरण,
चिड़िया भी अब भूल गई
अपनी वो ऊंची उड़ान |
चहुँ ओर त्राहिमाम मचा रहा,
कानों में गुंजता रुदन,
चीलों को भी भा रहीं,
मानव मॉस की सड़न |
लग रहा जैसे हो रहा,
द्रोपदी का चीरहरण,
तो अब कोई न दे सकेगा,
मरे हुए मानवों का विवरण,
एक मंदिर ही शेष रह गया,
अब मंदाकिनी धोएंगी उसके चरण ।
उन सैनिकों को शत् शत्‌ नमन,
जो दे गये हमको अमन,
देश के लिए कर कुर्बा अपनी जान,
रख गये सेना का मान,
कहाँ से यह अदम्य साहस लाये थे वो,
पीड़ितों के लिए बन देवदूत आये थे वो,
आपदा में ऐसा काम कर गये,
जगत में अमर अपना नाम कर गये |
अब शुरू पूजन हो गया,
शुरू मंत्रों का गुंजन हो गया,
पर कया मानव सुधरेगा ?
क्या यह द्वंद्व सुलझेगा ?
रे मानव! चेतता है तो चेत जा,
मानता है तो मान जा,
यदि फिर ये जलजला आयेगा,
इस बार सम्पूर्णता से डुब जायेगा,
फिर उठना मुश्किल हो जायेगा,
उठ गया तो फिर संभल न पाएगा,
सुलझा ले अभी ये द्वंद्व
यही थे मेरे शब्द चंद,
क्यों खंड खंड उत्तराखंड
यह प्रकृति और मानव का इन्द्र ।।



Tuesday, 29 December 2020

गुब्बारे वाला कविता | Kavita gubbare wala | हिंदी कविता

  कविता  



 गुब्बारे वाला 


नन्हें-मुन्हें बालकों के कानों में 
जब पड़ती वो बाँसुरी की मधुर राग ,
घर के जिस भी कोने में 
लुके हों वो नटखट से सैतान ,
फिर देखो उनके छोटे-छोटे कदमों की वो थिरक चाल। 

माँ-बाबा को मनाना है बस वो गुब्बारा पाना है ,
न करेंगे कोई सैतानी ,
ओ माँ वो देखो गुब्बारे वाला आया है। 
होगी आपकी हर आज्ञा पूरी ,
ओ बाबा बस वो गुब्बारा पाना है। 

By - A.S.      

Wednesday, 21 October 2020

क्षत्राणी कविता | Kshatraanee | क्षत्रिय कविता | Kshatriya Poem (Shayri)

 क्षत्राणी 


क्षत्राणी दो वंशो की गाथा

क्षत्राणी नए युग की जननी

क्षत्राणी अखण्डता में एकता की मिसाल

क्षत्राणी क्षत्रियता की पहचान |


By - A . S .  

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Monday, 23 March 2020

Song on Corona virus | कहे कोरोना सुन लो भइया | COVID-19 Poem | Awareness Song for COVID-19

 कहे कोरोना सुन लो भइया 

कहे कोरोना सुन लो भइया सुनो मजेकी बात 
एक दूसरे से न मिलाना हाथ कोरोना कहता है ये बात 
अगर न मानोगे ये बाते, हो जाओगे हैरान 
हाथों को साबुन से धोना 
स्वच्छ रखो जहान कोरोना कहता है ये बात। 

    Corona virus | कोरोना आया नमस्ते लाया | COVID-19 Song | Awareness Song for COVID-19

     कोरोना आया नमस्ते लाया 

    कोरोना आया नमस्ते लाया 
    एक मीटर की दूरी बनालो 
    हाथ न मिलाना नमस्ते अपनालो 
    अमेरिका ने भी भारत को माना 
    नमस्ते कहना हाथ मिलाना 
    कोरोना आया नमस्ते लाया। 


    Saturday, 21 March 2020

    Corona Poem | आया कोरोना सावधान होना | COVID-19 Song | Song for COVID-19 Awareness

     देश वासियों लेलो सीख 

    आया कोरोना-आया कोरोना 
    सावधान होना-सावधान होना 
    हाथों को अपने हैण्डवाश से धोना 
    आया कोरोना-आया कोरोना
    इस कोरोना से डरना नहीं है 
    संकट में हमको घबराना नहीं है 
    संकटमोचन से अरजी करोना 
    आया कोरोना-आया कोरोना 
    दादी-नानी से सीख हमे लेना 
     आया कोरोना-आया कोरोना
    दोनों हाथ जोड़कर विनती करोना 

    Sunday, 27 October 2019

    दिवाली / कविता दिवाली / हिन्दी कविता आओ मनाए दीपोत्सव / Hindi Short Poem on Diwali in hindi / Aao mnae deepotsav / kvita dipavali par / deepotsav

     कविता  

    Diwali, Diya, Deepavali, Celebration, Traditional

       दीपोत्सव   

    आओ मनाए दीपोत्सव 
    घर - घर प्रजवलित करों दीप कुंज 
    रोशन हो धरा 
    हर मन हो उमंग भरा।

             By - A.S.


    दिवाली / कविता दिवाली / हिन्दी कविता आयी दीवाली आयी दिवाली / Hindi Poem on Diwali in hindi / Divali aayi diwali aayi / kvita dipavali par

     कविता  

    Three, Diya, Light, Flame, Ignite, Fire, Burning Diya

       दिवाली   

    आयी दिवाली आयी दिवाली आयी दिवाली 
    दीपों का त्योहर दिवाली आयी दिवाली आयी दिवाली 
    सबके मन को भायी दिवाली आयी दिवाली... 
    रामचन्द्र जी जब चौदह वर्षों बाद अपने घर आये 
    नगर वासियों ने मनाई दिवाली आयी दिवाली 
    नगर अयोध्या जगमग हो गया 
    सब नगर वासियों के नाथ थे आये 
    इसी ख़ुशी में नगर वासियों ने देखो 
    मनायी दिवाली आयी दिवाली आयी दिवाली... 
    दिवाली की रात को देखो अयोध्या में दिन हो गया था 
    इतने दीप जलाये कि जग रोशन हो गया था 
    तब से गयी मनाई दिवाली आयी दिवाली ...
    लक्ष्मी - गणेश की पूजा करके 
    सुख समृद्धि लायी दिवाली आयी दिवाली आयी दिवाली...
                             By - S.S.Bhadouria


    Friday, 27 September 2019

    कविता आकाश | व्योम क्या है ? कविता | गगन पर कविता | नभ पर कविता | Hindi Poem | हिन्दी कविता | आकाश पर हिन्दी कविता

      आकाश  

     व्योम क्या है ? 

    समझो यह बात बताये जरा ,
    गगन की छटा निराली है ,
    यह गगन हमारा नीला है ,
    इसकी शोभा अति प्यारी है। 
    जब सुबह - सुबह हम देखे तो 
    सूरज दादा आ जाते है 
    इनके आने की क्या शोभा 
    जन्नत जैसी मतवाली है 
    उस शोभा पर जब नजर पडे ,
    आँखे सबकी खुश हो जाये 
    यह गगन हमारा नीला है ,
    इसकी शोभा अति प्यारी है। 
    इस नील गगन के नीचे हम 
    सुख चैन से हरदम रहते है 
    ये व्योम हमारी छतरी है ,
    हम नीचे चलते रहते है 
    इंसान व्योम से कुछ सीखे 
    मिल जल कर कैसे रहते है ,
    सूरज - चन्दा - अनगिनत तारे 
    कैसे नभ में मिलकर रहते है। 



    Monday, 9 September 2019

    Poem on Moon | चाँद पर कविता | चन्द्रमा | चन्दा मामा | कविता चाँद | Hindi Poem | हिन्दी कविता

     कविता 

      चन्द्रमा  

    आओ अब कुछ हम जिकर करे 
    चन्दा मामा के बारे में - चन्दा मामा के बारे में 
    दादी - नानी ने भी देखो इनकी शोभा का गान किया 
    हम भी तो अपनी पीढ़ी को इनकी महिमा का बक्खान करे 
    संध्या के समय जब सूरज जी
    अपने घर जाने लगते है 
    उनके जाने के कुछ पहले ही चन्दा आने लगते है। 
    जैसे मीठी बाणी सुनकर हृदय शीतल हो जाता है,
    वैसे चन्द्रमा के आने से मौसम शीतल हो जाता है,
    इनकी शीतलता को पाकर 
    ये व्योम ओस बरसाता है 
    ये ओस की बूँदे धरती पर ऐसी सुन्दर छा जाती है 
    मानो धरती ये स्वर्ग बनी हम स्वर्ग पे रहने वाले हैं। 
    अब भारत के वैज्ञानिक भी चन्दा मामा को समझ गये 
    अपनी टेक्नलॉजी के दम पर चाँद की कक्षा पर पहुँच गये 
    वो दिन भी अब है दूर नहीं 
    जब भारत वहाँ तक पहुँचेगा 
    आशा की किरण बिछाली हैं। 
                             By - S.S.Bhadouria

    Saturday, 31 August 2019

    ये आरज़ू है | ये आरज़ू है फ़ितरते हुस्न की | Hindi Poem | Ye aarju hai | Shayari

    ये आरज़ू है 

    ये आरज़ू है फ़ितरते हुस्न की 
    या खुदा मुझे ईमान बक्शना 
    बेईमान तो हर ओर है 
    मुझे जन्नत नहीं न सही 
    बस सुकून देना 
    ये इल्तेज़ा है 
    मुझपे भी रहमत नज़र रखना। 

                                      BY - A.S.

    Sunday, 25 August 2019

    वसुधा क्या है? | कविता | वसुधा कविता | धरती पर कविता | वसुधा पर कविता | Hindi Poem | Vasudha par kavita | Hindi kavita

     वसुधा क्या

    आओ अब तुम्हें सुनाये जरा ,
    दुनिया की रीति निराली है। 
    ये धरती हरि की पत्नी है ,
    जिसमे सबने दृष्टि डाली है। 
    https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEhHAABnjtTugInPa_caqZ2lEyPA4nZdvkEn1UYcMDrOaxYSvomO237YQTt7VfR8YRS1xj6wLw-XyOW_mcD_4z1WkyvE6KB0_wR8G3RWftyl1AkBGFN7XCJj6Wbjwl34Bu_-c4azfH2Ku0f5/s1600/IMG-20190509-WA0002.jpgइस वसुधा का सम्मान करो ,
    गर जीवन सफल बनाना है। 
    इसमे रहते है जीव बहुत ,
    नेको अनेक और नाना है 
    ये वेदो ने भी माना है। 
    उठकरके सुबह तुम बिस्तर से ,
    इस वसुधा को प्रणाम करो। 
    ये वसुधा हरि की पत्नी है ,
    वेदो ने भी ये बखाना है। 
    होगा कल्याण तभी तेरा ,
    वरना जाना अन्जाना है। 
    लो मैंने तुम्हें सुनाया है 
    दुनिया की रीति निराली है। 
                                     By - S.S.Bhadouria

    Tuesday, 7 May 2019

    मंज़िल अब दम तोड़ चली | Mnjil ab dam tod chli

      मंज़िल अब दम तोड़ चली  

    सूनी खिड़की पग दौड़ चले ,
    ये वही आँगन जहाँ कल कभी न लौट चले। 
    ये वही राहे जहाँ मिलती थी मंजिले मेरी ,
    ये वही डगर ,
    मैं वही पथिक 
    पर मंज़िल कुछ रूठी-रूठी सी हैं। 
    ये वही घोसला पर पक्षी अब और कही ,
    ये वही आसमा पर तारे अब और कही ,
    ये वही जहाँ पर बासिन्दे अब और कही ,
    ये वही शामे पर महफ़िल अब और कही ,
    मैं वही पथिक 
    पर मंज़िल अब खोई-खोई सी हैं। 
    ये वही जहाँ हैं जहाँ से हम हैं ,
    ये वही आँखे जो तलाशती अपना जहाँ जो अब कहाँ हैं। 
    वही कुछ दूर बाग पास है वही नदी 
    पर धारा अब मुड़ी-मुड़ी सी है 
    क्योंकि मंज़िल अब दम तोड़ चली हैं। 

    Friday, 7 December 2018

    कविता माँ धरती / हिन्दी कविता धरती मेरी माता है / Hindi Poem on Mother Earth in hindi / ma dhrti kvita / kvita dharti meri mata ha

       माँ धरती   

    धरती मेरी माता है इनसे मेरा नाता है।
    मेरी नहीं हम सबकी ये धरती प्यारी धरती माता है।
    वसुन्धरा है इनका नाम पालन करना इनका काम।
    अन्न ,फूल ,फल हमको देती बदले में न कुछ भी लेती।
    देती सबको और तमाम वसुन्धरा है इनका नाम।
    मनुष्य ,जानवर ,पशु ,पक्षी सब करते है यही विश्राम।
    राम-कृष्ण भी आये यहाँ पर अपनी वीरता का ले पैगाम
    वसुन्धरा है इनका नाम।
    एक समय इस वसुन्धरा पर सती हुई स्त्रियाँ तमाम 
    कर गयी कायम अपना नाम वसुन्धरा है इनका नाम।

    By - S.S.Bhadouria     

    Monday, 3 December 2018

    कविता जल ही जीवन / हिन्दी कविता / Hindi Poem on Water is Life / jl hi jivn kvita

     जल ही जीवन  

    जल ही जीवन हम सब का 
    जल को समझो अपना 
    जल न बचेगा अगर तो  
    टूट जायेगा जीवन का सपना 
    जल न बचेगा जिस दिन धरा पे 
    क्या होगा जीवन का 
    त्राहि-त्राहि मच जायेगी जीवन में 
    जीवन बन जायेगा सपना 
    इसीलिए कहती हूँ सबसे 
    जल को समझो अपना 
    जल ही जीवन हम सब का है 
    जल को समझो अपना 
    जल को समझो अपना 
    अगर है जीवन पाना 
    जल न मिला तो 
    नहीं चलेगा कोई बहाना अपना 
    जल को समझो अपना। 
    By - S.S.Bhadouria       

    Friday, 16 November 2018

    Poem on Mahatma Gandhi ( Father of Nation) / गाँधी बापू कविता / कविता

     गाँधी बापू  

    कहते है कोटाल गाँव में अब भी लोग कहानी 
    सन् 52 की बात बड़ी है वर्षो-वर्ष पुरानी 
    गाँधी जी जब देश सेवा हित चन्दा लेने आये 
    जन-जन के सम्मुख गाँधी ने अपने कर फैलाये 
    अपने कर फैलाये देश को आजाद कराये 
    अंग्रेजो से करके लडाई अपना देश बचाये 
    ऐसे कर्मचन्द्र बापू को हम अपना शीश झुकाये 
    शीश झुकाये - शीश झुकाये।

                                   By - S.S.Bhadouria

    Sunday, 11 November 2018

    Hindi Poem on SURAJ DADA / kvita suraj par / सूरज दादा कविता

      सूरज दादा  

    सूरज दादा - सूरज दादा
    मेरे प्यारे सूरज दादा 
    आओ तुम्हे बुलाते दादा 
    सबके मन को भाते दादा 
    तुम न आओगे गर तो 
    हम बच्चों का क्या होगा 
    अन्धकार में फँसे रहे 
    हाल बुरा सबका होगा 
    बिना तुम्हारे नहीं चलेगी 
    इस वसुन्धरा की कोई चाल 
    तुम न आओगे गर तो 
    हो जायेगी धरा बेहाल 
    पौधे-पेड़ सभी मुरझायें 
    अन्न कहाँ पैदा होगा 
    जन जीवन का हाल बुरा 
    दादा मेरे मेरा क्या होगा 
    क्या होगा मेरा क्या होगा 
    हाल सभी का क्या होगा 
    सूरज दादा - सूरज दादा
    मेरे प्यारे सूरज दादा। 
                                                  By - S.S.Bhadouria  

    Shayari / na jane kis rah me hai jindgi / न जाने

     न जाने 

    न जाने किस राह में है ... जिन्दगी ,
    हम आगे बढ़ना ... नहीं चाहते 
    और ...
    कदम ... रुकना नहीं चाहते .....

                                By - A.S.